रिजल्ट .....
रिजल्ट तो हमारे जमाने मे आता था 10 दिन पहले हवा फैल जाती थी हर रात को बोला जाता था कि आज रिजल्ट है और अखबार वाला रात 12 बजे के बाद कभी भी आ सकता है
पहले 2 दिन तो आता नहीं था लेकिन जिस दिन आता था हाहाकार मच जाती थी , रोल नंबर ढूंढते ढूंढते कई सदियों का सफर बीत जाता था , कोई कंट्रोल एफ का फंक्शन तो था नही की फट से सर्च करो और मिल जाये
बेचारा अखबार वाला कोयले की खदान के मजदूर से भी ज्यादा मेहनत करता था कालेज के नाम को और रोल नंबर को ढूंढने में
जब कोई पास हो जाये तो खड़क से अखबार वाले के मुँह पर भी इतनी खुशी आ जाती थी कि चलो कुआं खोदने में समय तो लगा पर पानी आखिर मिल ही गया
जिसका रिजल्ट बस पास होता दिख जाए तो क्या खुशी जैसे कि गर्ल फ़्रेंड के साथ शादी होने पर होती है कि माता रानी ने मुराद पूरी कर दिया
उस समय पर सब निर्मोही हुआ करते थे कोई ये नही देखता था कि कौन सी डिवीजन से पास हुआ है, क्योंकि बस पास ही हो जाये कोई तो पूरे मुहल्ले और दूर दूर के गाँवो में खबर ऐसे फैलती थी कि जैसे आजकल जंगलों में लगी हुई आग फैलती है
अखबार में सिर्फ F प्रथम श्रेणी S द्वितीय श्रेणी और T तृतीय श्रेणी लिखा होता था बाकी सब गायब जैसी की मिस्टर इंडिया का अनिल कपूर बैठा हो और फेल होने वाले का रोल नंबर गायब कर दिया हो
उस पुरा पाषाण युग मे बस ऊपर लिखा हुआ कुछ दिख जाए तो रात को ही भांगड़ा शुरू हो जाता था उस समय डांस ऐसा होता था कि साक्षात माइकल जैक्सन की आत्मा घुस पड़ी हो बस शकीरा भी साथ मे होती तो मैं भी नाच लेता
जिस किसी का रोल नम्बर नही दिखता उसे बोला जाता था भाई कोई नही अगली बार मेहनत करना परंतु अखबार वाला जो रिजल्ट दिखाता है वो मन ही मन इतनी गाली देता था कि मानो गर्लफ्रेण्ड के पिताजी ने शादी को मना किया हो तो मन के अंदर तो गालियां है परंतु बाहर से सांत्वना दे रहा हो
और सबसे बड़ा झटका तो उन्हें पड़ता था जहाँ पूरे पूरे स्कूल गांव अखबार से गायब ऐसे हुआ करते थे जैसे गब्बर सिंह जंगल से गांव आ रहा हो और गांव वाले गायब हो जाया करते थे ...

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