So sad..
कितने सरे सपने होते है किसी हम जैसे लोअर मिडिल क्लास के एक तो पहाड़ो से दूसरा शहर की आपाधापी से दूर जहां न ज्यादा गाड़ियों की आवाजे है न दिन...
So sad..
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