Wednesday, September 28, 2022
कितने सरे सपने होते है किसी हम जैसे लोअर मिडिल क्लास के एक तो पहाड़ो से दूसरा शहर की आपाधापी से दूर जहां न ज्यादा गाड़ियों की आवाजे है न दिन रात की भागदौड़ बस है तो सुबह उठे खेतो में गए या जंगल घास लकड़ी लेने बस इसी से इन पहाड़ो की दिनचर्या चलती रहती है पर उस अभागी बिटिया अंकिता को क्या पता था इन सुनसान और नरम पहाड़ो में अब दानव रूपी असुर आ चुके है
पुनः भावना से दिवंगत बेटी अंकिता की आत्मा की शांति प्रार्थना
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